दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर आवारा कुत्तों का आतंक अब और नहीं चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए स्थानीय प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया है। बच्चों और बुजुर्गों को सड़कों पर सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट ने आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने का निर्देश दिया। यह फैसला रेबीज के बढ़ते मामलों और कुत्तों के हमलों से होने वाली मौतों की खबरों के बाद आया है, जो समाज में डर का माहौल बना रहे हैं।
जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों की जान से ज्यादा कीमती कुछ नहीं है, और इस समस्या से निपटने के लिए भावनाओं को दरकिनार कर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। यह आदेश न केवल दिल्ली-एनसीआर के लिए बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है।
कोर्ट के प्रमुख आदेश और बयान
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में कुछ सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए, जो इस समस्या के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाते हैं। ये हैं कोर्ट के पांच प्रमुख बयान:
- सड़कों को कुत्तों से मुक्त करने के लिए हर संभव तरीके से आवारा कुत्तों को पकड़ा जाए, ताकि बच्चे और बुजुर्ग बिना डर के घूम सकें।
- कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा, “जो लोग खुद को पशु प्रेमी कहते हैं, क्या वे उन बच्चों की जान वापस ला सकते हैं, जो कुत्तों के हमलों का शिकार हुए? अब बातें बंद, कार्रवाई शुरू हो!”
- दिल्ली-एनसीआर के नागरिक प्रशासन को आठ सप्ताह के भीतर कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने और पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने का आदेश दिया गया। इन शेल्टर्स में कुत्तों की नसबंदी होगी और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। शेल्टर्स में सीसीटीवी निगरानी भी होगी।
- बच्चों और छोटे बच्चों को रेबीज का शिकार होने से बचाने के लिए हर कीमत पर कदम उठाए जाएं। लोगों में यह भरोसा जगना चाहिए कि वे सड़कों पर बिना डर के चल सकते हैं।
- एक सप्ताह के भीतर एक हेल्पलाइन शुरू की जाए, जहां कुत्तों के काटने या रेबीज के मामले दर्ज किए जा सकें। शिकायत मिलने के चार घंटे के भीतर कुत्ते को पकड़ा जाए और उसकी नसबंदी की जाए। कोई भी व्यक्ति या संगठन इस काम में बाधा डाले, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह फैसला न केवल दिल्ली-एनसीआर बल्कि देश के उन सभी हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां आवारा कुत्तों की समस्या लोगों के लिए खतरा बनी हुई है। कोर्ट का यह सख्त रुख समाज में एक सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
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