भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को एक बार फिर हाहाकार मच गया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 400 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक टूटकर नीचे आ गया। इस गिरावट ने निवेशकों के दिलों की धड़कन बढ़ा दी, खासकर जब अडानी पोर्ट्स से लेकर रिलायंस जैसे दिग्गज शेयर लाल निशान में डूबे नजर आए। आखिर क्या है इस अचानक गिरावट की वजह? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ धमकी ने बाजार को हिलाकर रख दिया? आइए, इसकी पड़ताल करते हैं।
बाजार की शुरुआत में ही मायूसी
मंगलवार सुबह शेयर बाजार ने कमजोर शुरुआत की। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 81,018.72 की तुलना में 80,946.43 पर खुला और कुछ ही देर में 440 अंकों की गिरावट के साथ 80,558.94 के स्तर पर आ गया। निफ्टी-50 भी इससे अछूता नहीं रहा। यह अपने पिछले बंद 24,722.75 से थोड़ी गिरावट के साथ खुला, लेकिन जल्द ही 121.85 अंकों की गिरावट के साथ 24,593 तक लुढ़क गया। इस दौरान बाजार में मिश्रित रुझान दिखा। जहां 1,519 कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया, वहीं 1,571 कंपनियों के शेयर नीचे गिरे। 146 कंपनियों के शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
ये 10 शेयर हुए धड़ाम
बाजार की इस उथल-पथल में कुछ बड़े शेयरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। लार्जकैप सेगमेंट में अडानी पोर्ट्स (1.40%), बीईएल (1.30%), इन्फोसिस (1.25%) और रिलायंस (लगभग 1%) जैसे शेयरों ने निवेशकों को निराश किया। मिडकैप श्रेणी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम (3.25%), एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (2.31%) और बायोकॉन (2.35%) जैसे शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। स्मॉलकैप सेगमेंट में स्थिति और भी चिंताजनक थी। अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रा के शेयर में 5% का लोअर सर्किट लग गया, जबकि इनॉक्स इंडिया (4.52%) और नेटवेब (3.94%) भी भारी नुकसान के साथ कारोबार करते दिखे।
ट्रंप की धमकी या कुछ और?
बाजार में इस गिरावट की वजह को समझने के लिए हमें वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालनी होगी। हाल के दिनों में अमेरिकी टैरिफ नीतियों ने एशियाई बाजारों, खासकर भारत, पर गहरा असर डाला है। सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल के आयात को लेकर भारत पर निशाना साधा और नई टैरिफ धमकी दी। इससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई। हालांकि, भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कहा कि ट्रंप की आलोचना करने वाले देश खुद रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं। यह वैश्विक व्यापार युद्ध की आहट है या महज अस्थायी हलचल, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि ये टैरिफ धमकियां भारतीय निर्यात क्षेत्र, खासकर टेक्सटाइल और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों पर दबाव डाल रही हैं।
भारतीय बाजार की मजबूती की बात करें तो विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का 24,500 के स्तर पर टिके रहना एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि बाजार में अभी भी कुछ हद तक लचीलापन बरकरार है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ जैसे मुद्दे बाजार को अस्थिर कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए सलाह: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का खेल पुराना है। ऐसे में कोई भी निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर संपर्क करें। सही रणनीति और धैर्य के साथ आप इस तूफान को भी पार कर सकते हैं।
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