भारतीय खेलों के लिए एक ऐतिहासिक दिन! लोकसभा ने 11 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। खेल मंत्री मानसुख मांडविया ने इसे आजादी के बाद खेल जगत में सबसे बड़ा सुधार बताया। यह विधेयक न केवल खेल प्रशासन को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भी मजबूत करेगा। लेकिन क्या यह विधेयक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) जैसे धनाढ्य संगठन को भी प्रभावित करेगा? आइए, इसकी गहराई में उतरते हैं।
खेलों में सुधार का नया अध्याय
मानसुख मांडविया ने लोकसभा में कहा, “यह विधेयक खेलों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। यह भारत के खेल इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम है।” यह विधेयक उन समस्याओं को दूर करने की कोशिश है, जो लंबे समय से भारतीय खेलों को पीछे खींच रही हैं। भारत जैसे विशाल देश में, जहां क्रिकेट से लेकर कबड्डी तक हर खेल का जुनून देखा जाता है, यह विधेयक खिलाड़ियों और प्रशासकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा।
हालांकि, विपक्ष ने इस दौरान बिहार में मतदाता सूची संशोधन के मुद्दे पर हंगामा किया, जिसके कारण चर्चा सीमित रही। फिर भी, विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह कदम भारत के खेल प्रशासन को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक: मुख्य बिंदु
यह विधेयक खेलों में सुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान लाता है। आइए, इसके प्रमुख पहलुओं पर नजर डालें:
राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) की स्थापना
- यह बोर्ड सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) की निगरानी करेगा।
- सरकारी फंडिंग के लिए NSFs को NSB से मान्यता लेनी होगी।
- अगर कोई महासंघ चुनाव नहीं कराता या वित्तीय अनियमितताएं करता है, तो NSB उसे मान्यता रद्द कर सकता है।
राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल का गठन
- यह ट्रिब्यूनल खिलाड़ियों और महासंघों के बीच विवाद सुलझाएगा।
- इसके फैसले केवल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जा सकते हैं।
- यह ट्रिब्यूनल चयन प्रक्रिया से लेकर चुनावी विवाद तक हर मुद्दे पर फैसला लेगा।
BCCI और RTI का दायरा
- BCCI ने हमेशा RTI के दायरे में आने का विरोध किया है, क्योंकि यह सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं है।
- नए विधेयक में केवल सरकारी फंडिंग वाले संगठनों पर RTI लागू होगा, जिससे BCCI को राहत मिली है।
- फिर भी, BCCI को NSB की निगरानी में काम करना होगा, जो क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता ला सकता है।
उम्र सीमा में बदलाव
- पहले खेल प्रशासकों की उम्र सीमा 70 साल थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 75 साल कर दिया गया है, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय नियम इसकी अनुमति दें।
डोपिंग रोधी विधेयक: NADA को और स्वायत्तता
राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप लाया गया है। 2022 में पारित मूल कानून को WADA ने सरकारी हस्तक्षेप के कारण लागू करने से रोक दिया था। अब संशोधित विधेयक में:
- राष्ट्रीय डोपिंग रोधी बोर्ड को बनाए रखा गया है, लेकिन इसे NADA पर नियंत्रण या सलाह देने का अधिकार नहीं होगा।
- NADA को पूर्ण “परिचालन स्वायत्तता” दी गई है, ताकि यह बिना किसी दबाव के जांच और कार्रवाई कर सके।
यह बदलाव भारत को वैश्विक खेल मंच पर डोपिंग के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने में मदद करेगा।
भारत का ओलंपिक सपना
यह विधेयक 2036 ओलंपिक की मेजबानी की भारत की महत्वाकांक्षा को मजबूत करता है। मांडविया ने कहा, “हमारी युवा आबादी को सही मंच और प्रशासन मिले, तो हम न केवल मेडल जीत सकते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।” यह विधेयक खिलाड़ियों को निष्पक्ष चयन और बेहतर सुविधाएं देने का वादा करता है।
क्या यह विधेयक भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा? आपकी राय क्या है? हमें कमेंट में बताएं!





