वैश्विक मंच पर हलचल मची हुई है! 15 अगस्त को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली भेंट पूरी दुनिया की नजरों में है। यह मुलाकात रूस-युक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। लेकिन इस बहुप्रतीक्षित भेंट से पहले युक्रेन ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है। युक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर लंबी बातचीत की है। भारत जैसे प्रभावशाली देश का समर्थन हासिल करने की यह रणनीति क्या ट्रम्प-पुतिन की मुलाकात का रंग बदल देगी? आइए जानते हैं।
विश्व समुदाय का समर्थन जुटाने की कोशिश
ज़ेलेंस्की ने 11 अगस्त की शाम को पीएम मोदी से फोन पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने रूस-युक्रेन युद्ध की ताजा स्थिति से भारत को अवगत कराया। ज़ेलेंस्की ने न केवल भारत, बल्कि कई अन्य देशों के नेताओं से भी बात की है, ताकि रूस के आक्रामक रवैये के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाया जा सके। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत ने हमेशा युद्ध में शांति की वकालत की है, और मोदी की कूटनीति को वैश्विक मंच पर सम्मान मिलता है।
ज़ेलेंस्की-मोदी बातचीत में क्या हुआ?
ज़ेलेंस्की ने अपनी बातचीत का ब्यौरा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। उनके मुताबिक, उन्होंने पीएम मोदी को रूस के हालिया हमलों की जानकारी दी। 10 अगस्त को रूस ने युक्रेन के शहरों और गांवों पर हवाई हमले किए, जिसमें ज़ापोरिज़िया में एक बस स्टॉप तबाह हो गया। कई लोग घायल हुए, और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। ज़ेलेंस्की ने कहा, “जब शांति की बात हो रही है, तब रूस हिंसा और जमीन हड़पने में लगा है।” उन्होंने मोदी से अपील की कि भारत युक्रेन के लोगों के साथ खड़ा रहे। यह बातचीत भारत की तटस्थ किंतु प्रभावी कूटनीति को दर्शाती है।
ट्रम्प की शांति कोशिशों पर सवाल
डोनाल्ड ट्रम्प रूस और युक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय हैं। उनकी पुतिन से मुलाकात को युद्ध खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन ज़ेलेंस्की की यह ‘फोन डिप्लोमेसी’ ट्रम्प के प्रयासों को चुनौती दे रही है। युक्रेन का कहना है कि रूस की आक्रामकता के सामने शांति की बात बेमानी है। क्या ज़ेलेंस्की की यह रणनीति ट्रम्प-पुतिन मुलाकात को प्रभावित करेगी? यह सवाल पूरी दुनिया के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।
भारत की भूमिका इस संकट में क्या होगी? क्या पीएम मोदी की शांति की अपील युद्ध को थामने में मदद करेगी? अपनी राय कमेंट में साझा करें!





