भारत सरकार ने Income Tax Bill 2025 को वापस ले लिया है, जो देश की टैक्स प्रणाली को और आधुनिक बनाने का एक बड़ा कदम माना जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक, 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किए गए इस बिल का एक नया और बेहतर संस्करण अब 11 अगस्त को संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। यह नया बिल बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिशों को शामिल करेगा, जिसका उद्देश्य आम करदाताओं के लिए टैक्स प्रक्रिया को और सरल व पारदर्शी बनाना है।
नए बिल का मकसद पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को बदलना है, जो दशकों से चली आ रही जटिलताओं को दूर करने में मदद करेगा। यह कदम न केवल टैक्स प्रणाली को सुव्यवस्थित करेगा, बल्कि आम भारतीय परिवारों के लिए वित्तीय बोझ को कम करने में भी सहायक होगा। आइए, जानते हैं कि इस नए बिल में क्या-क्या बदलाव प्रस्तावित हैं और ये आम आदमी के लिए क्यों मायने रखते हैं।
मकान संपत्ति से आय पर टैक्स नियमों में बदलाव
चयन समिति ने मकान संपत्ति से आय अर्जित करने वाले लोगों के लिए दो बड़े बदलाव सुझाए हैं, जो सीधे तौर पर मध्यम वर्ग को राहत दे सकते हैं।
- 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन की स्पष्टता: मौजूदा नियमों में म्युनिसिपल टैक्स कटौती के बाद 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा है, लेकिन इसे नए बिल में और स्पष्ट रूप से शामिल करने की सिफारिश की गई है। इससे करदाताओं के बीच किसी भी तरह की भ्रांति दूर होगी, खासकर उन लोगों के लिए जो किराए के मकान से आय अर्जित करते हैं।
- होम लोन ब्याज में छूट का दायरा बढ़ेगा: अभी तक होम लोन के ब्याज पर छूट केवल स्व-उपयोग वाली संपत्तियों के लिए उपलब्ध थी। समिति ने सुझाव दिया है कि यह छूट किराए की संपत्तियों पर भी लागू हो। यह बदलाव उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो अपनी दूसरी संपत्ति किराए पर देकर अतिरिक्त आय कमाते हैं।
टीडीएस और टीसीएस रिफंड प्रक्रिया होगी आसान
कई करदाताओं को टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) और टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) के रिफंड में लंबी देरी का सामना करना पड़ता है। समिति ने इस प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। इसका मतलब है कि अब आपको अपने मेहनत के पैसे का इंतजार लंबा नहीं करना पड़ेगा।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने भी “Empathy with Enforcement” नीति के तहत नए नियम बनाने की बात कही है, जिसका उद्देश्य ईमानदार करदाताओं की परेशानियों को कम करना है। यह कदम न केवल टैक्स प्रणाली में विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लिए भी राहत लेकर आएगा।
चयन समिति ने 21 जुलाई को अपनी 4,500 पेज की विस्तृत रिपोर्ट संसद में पेश की थी, जिसमें 285 सुझाव दिए गए हैं। ये सुझाव न केवल टैक्स सिस्टम को आधुनिक बनाएंगे, बल्कि इसे और करदाता-अनुकूल भी बनाएंगे। जैसे कि एक आम भारतीय परिवार जो हर महीने अपनी आय और खर्च का हिसाब किताब करता है, वैसे ही यह बिल सरकार और नागरिकों के बीच एक नया विश्वास बनाने की दिशा में कदम है।
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