कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में अनियमितताओं का आरोप लगाकर सियासी हलचल मचा दी। उनके इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
पात्रा ने राहुल के बयानों को दो हिस्सों में बांटा- तकनीकी और राजनीतिक। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी का असली मकसद बीजेपी को निशाना बनाना है। जब वे जीतते हैं, तब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाते, लेकिन हारते ही संस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर देते हैं।” पात्रा ने तंज कसते हुए पूछा कि जब कांग्रेस हिमाचल या तेलंगाना जैसे राज्यों में जीत हासिल करती है, तब राहुल गांधी चुनाव आयोग की तारीफ क्यों नहीं करते? “लोकसभा में 99 सीटें जीतने पर तो आप जश्न मनाते हैं, लेकिन जब हार मिलती है, तब लोकतंत्र पर सवाल उठाते हैं। यह कैसी दोहरी मानसिकता है?”
पात्रा ने राहुल पर संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी कि अगर उनके सवालों का जवाब नहीं मिला, तो ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे। “राहुल गांधी ने यह तक कह दिया कि भविष्य में विपक्ष की सरकार बनने पर एक-एक अधिकारी को जवाब देना होगा। यह भाषा किसी जिम्मेदार नेता की नहीं, बल्कि दबाव की राजनीति करने वाले की है।”
बीजेपी प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि अगर राहुल गांधी के पास फर्जी मतदाताओं के सबूत हैं, तो वे कोर्ट क्यों नहीं गए? पात्रा ने कहा, “राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से पहले चुनाव आयोग से संपर्क क्यों नहीं किया? पिछले साल नवंबर में महाराष्ट्र चुनाव को लेकर राहुल ने सवाल उठाए थे, तब आयोग ने उन्हें दिसंबर में ही चर्चा के लिए बुलाया था। उस समय कांग्रेस के पास 28,420 बूथ लेवल एजेंट थे, फिर भी कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई।”
पात्रा ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने हाल ही में राहुल से उनके दावों के समर्थन में शपथ पत्र के साथ सबूत मांगे हैं। लेकिन राहुल का कहना है कि उनके शब्द ही उनकी शपथ हैं। पात्रा ने इस पर तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी पहले भी राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट से माफी मांग चुके हैं। तब उनकी बातें शपथ नहीं मानी गई थीं।”
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने एक बार फिर सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है। क्या राहुल गांधी के आरोपों में दम है, या यह सिर्फ राजनीतिक नौटंकी है?
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