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क्या है ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का सच? राहुल गांधी ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल

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राहुल गांधी ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल

भारत का लोकतंत्र दुनिया में अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है, लेकिन क्या यह वाकई में उतना पारदर्शी है जितना हम मानते हैं? शुक्रवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शिवसेना सांसद संजय राउत और एनसीपी-एससीपी सांसद सुप्रिया सुले के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यही सवाल उठाया। उन्होंने महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनावों में कथित अनियमितताओं पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगा।

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की नींव ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत पर टिकी है। लेकिन अगर मतदाता सूची में ही गड़बड़ियां हों, तो यह सिद्धांत खतरे में पड़ जाता है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में लगभग 40 लाख संदिग्ध वोटरों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठते हैं। “हमारे पास ठोस सबूत हैं, और हम इसे लिखित रूप में चुनाव आयोग को सौंपेंगे,” राहुल ने कहा, यह जोड़ते हुए कि वे चाहते हैं कि आयोग इन सवालों का जवाब दे।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने एक प्रेजेंटेशन के जरिए अपने दावों को मजबूती दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने गहन शोध किया है और एक विशेष निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची की गड़बड़ियों को उजागर किया है। “यह सिर्फ महाराष्ट्र की बात नहीं है, यह पूरे देश के लोकतंत्र का सवाल है,” उन्होंने जोर दिया। राहुल ने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग पारदर्शिता के साथ जवाब नहीं देता, तो विपक्ष इस मुद्दे को जनता के सामने ले जाएगा।

संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी और कहा कि मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब इसे रोकने का समय आ गया है। सुप्रिया सुले ने जोड़ा कि यह केवल एक पार्टी की लड़ाई नहीं, बल्कि देश के हर उस नागरिक की लड़ाई है जो अपने वोट के अधिकार को महत्व देता है।

राहुल ने यह भी बताया कि विपक्ष ने पहले ही चुनाव आयोग को कई पत्र लिखे हैं, लेकिन जवाब का इंतजार अभी भी बाकी है। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर भारतीय का वोट सुरक्षित रहे, चाहे इसके लिए हमें कितना भी संघर्ष करना पड़े,” उन्होंने कहा। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस न केवल राजनीतिक हलकों में, बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है।

क्या यह मुद्दा भारत के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा, या यह केवल राजनीतिक रस्साकशी का हिस्सा बनकर रह जाएगा? यह समय ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का सिद्धांत हर भारतीय के दिल में बस्ता है, और इसे बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

जानिए राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी ने क्या जवाब दिया?

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